"राजभाषा नीति उसका महत्व व कार्यान्वयन" पर कार्यशाला

दिनांक: 30-06-2022



भारत सरकार की राजभाषा नीति के अनुसरण में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा समय-समय पर राजभाषा हिन्दी के संबंध में कार्यशाला एवं विचार-विमर्श संगोष्ठी इत्यादि आयोजित करने के लिए निर्देश जारी किए जाते हैं, इसी का अनुपालन करते हुए संस्थान में 30 जून, 2022 को ‘‘राजभाषा नीति, उसका महत्व व कार्यान्वयन" विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में पिछले कुछ वर्षों में नव नियुक्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों सहित नोडल अधिकारियों को भी शामिल किया गया। इस कार्यशाला में लगभग 40 प्रतिभागियों ने भागीदारी की।

सर्वप्रथम डॉ. नीरज चौरसिया (अध्यक्ष, हिन्दी कक्ष) ने जीवित पौधा भेंट करके प्रो. टी.आर. श्रीकृष्णन (उपनिदेशक, प्रचालन) तथा डॉ. दीपिका भास्कर (कुलसचिव) का स्वागत किया। इसके उपरान्त संस्थान के उप निदेशक प्रो. श्रीकृष्णन ने जीवित पौधा भेंट करके हमारे अतिथिवक्ता डॉ. सत्येन्द्र सिंह का अभिनन्दन किया।

कार्यशाला को आगे बढ़ाते हुए डॉ. चौरसिया ने कार्यशाला की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य कर्मचारियों को हिन्दी में कार्य करने के प्रति प्रोत्साहित करना तथा मंत्रालय से प्राप्त निर्देशों एवं लक्ष्यों को प्राप्त करना है। इस कार्यशाला का एक उद्देश्य यह भी है कि पिछले कुछ वर्षों में संस्थान में कार्यभार ग्रहण करने वाले नए अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी राजभाषा संबंधी ज्ञान एवं जानकारी हो। आपने प्रो. कृष्णन तथा डॉ. दीपिका भास्कर को कार्यशाला में अपना बहुमूल्य समय एवं सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया तथा कुलसचिव महोदया को सम्बोधन के लिए आमंत्रित किया।

संस्थान कुलसचिव डॉ. दीपिका भास्कर ने सभी प्रतिभागियों एवं अतिथिवक्ता का स्वागत करते हुए हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित की। आपने राजभाषा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अपने दैनिक प्रशासनिक कार्यों में उसके उपयोग पर बल दिया तथा बताया कि इस तिमाही में संस्थान ने अच्छी प्रगति की है जोकि सभी के सहयोग से संभव है हमें इस प्रगति को बनाए रखना है तथा जो कुछ भी समस्या कार्य के दौरान आती है उन सब का समाधान आज की इस कार्यशाला से प्राप्त किया जा सकता है। इसके उपरान्त डॉ. चौरसिया जी ने उप निदेशक (प्रचालन) को सम्बोधन के लिए आमंत्रित किया।

प्रो. टी.आर.श्रीकृष्णन ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि अतिथि वक्ता डॉ. सत्येन्द्र सिंह जी का कार्य अनुभव बहुत लम्बा रहा है यहां से प्राप्त ज्ञान को सभी प्रतिभागी अपने दैनिक प्रशासनिक कार्यों में उपयोग करेंगे, ऐसी आशा है तथा इसी में कार्यशाला की सार्थकता भी है। आप सभी को मेरी शुभकामनाएं।

आगे, डॉ. चौरसिया ने अतिथि वक्ता डॉ. सत्येन्द्र सिंह (सचिव, उप समिति संसदीय राजभाषा समिति) का परिचय देते हुए डॉ. सत्येन्द्र सिंह को कार्यशाला के लिए आमंत्रित किया।

डॉ. सत्येन्द्र सिंह जी ने सभी को धन्यवाद एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज की कार्यशाला का विषय हमारी अस्मिता, पहचान एवं आत्मा से संबंधित है। आपने संविधान के अनुछेद 53 में निहित सरकारी कर्तव्यों के प्रति शपथ सहित राजभाषा के अनुछेद 343 से 351 तक पर भी चर्चा की आपने जीवन की व्यवहारिकताओं का उदाहरण प्रस्तुत करके राजभाषा के महत्व को दर्शाया। सभी प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह एवं मनोयोग से सत्येन्द्र सिंह जी को सुना तथा अपने प्रश्न पूछकर समस्याओं का निवारण भी किया।

अंत में सुश्री रमा शर्मा (सहायक कुलसचिव, हिन्दी कक्ष) ने सभी प्रतिभागियों, अतिथिवक्ता, अध्यक्ष, (हिन्दी कक्ष) हिन्दी कक्ष के स्टाफ सदस्यों को सफलतापूर्वक कार्यशाला समापन के लिए धन्यवाद देते हुए कार्यशाला का समापन किया।

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